: Dattatreya dismisses the need for traditional meditation, rituals, or mental disciplines for the realized soul. For an Avadhuta, there is no "coming" or "going," no "purity" or "impurity," only the eternal presence. The 24 Gurus

(साभार: यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। सभी ग्रंथों का सम्मान करें।)

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अवधूत गीता का स्थान भारतीय आध्यात्मिक साहित्य में अत्यंत विशिष्ट है। यह ग्रंथ भगवान दत्तात्रेय (Lord Dattatreya) द्वारा रचित माना जाता है। भगवान दत्तात्रेय को 'अवधूत' कहा जाता है, जिसका अर्थ है—जो सांसारिक बंधनों और सामाजिक मर्यादाओं से परे हो। 'अवधूत' शब्द का अर्थ है—जिसने सभी पाश (बंधन) तोड़ दिए हों और जो स्वयं में पूर्ण हो।