की तरह ही, कृत्तिवासी रामायण ने भी उत्तर और पूर्वी भारत में भक्ति आंदोलन को मजबूती प्रदान की [2, 17]। मुख्य विशेषताएं पक्ष विवरण रचयिता
Unlike the more formal Valmiki Ramayan, Krittibas focused on (devotion) and adapted the epic to suit the cultural sensibilities of Bengal. krittivasi ramayan in hindi
माना जाता है कि कृत्तिवास ने यह ग्रंथ बंगाल के सुल्तान (जिसे बरबक शाह भी कहा जाता है) के शासनकाल में लिखा था। कहा जाता है कि एक दिन राजा ने कृत्तिवास से रामायण सुनने की इच्छा जताई, जिस पर कवि ने बंगाली भाषा में रामकथा लिखना प्रारंभ किया। उनका उद्देश्य था – संस्कृत से अपरिचित आम जनता को राम के चरित्र और आदर्शों से अवगत कराना। की तरह ही
हिंदी साहित्य और कृत्तिवासी रामायण का संबंध हिंदी के महान कवि गोस्वामी तुलसीदास krittivasi ramayan in hindi
कृत्तिवासी रामायण, जिसे 'श्रीराम पांचाली' के नाम से भी जाना जाता है, बांग्ला साहित्य की पहली महाकाव्यात्मक कृति है। 15वीं शताब्दी में कवि कृत्तिबास ओझा द्वारा रचित यह ग्रंथ केवल वाल्मीकि रामायण का अनुवाद नहीं है, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं, लोककथाओं और भक्ति भावना का सुंदर समावेश है। इस लेख में हम कृत्तिवासी रामायण के इतिहास, विशेषताओं, इसकी लोकप्रियता और इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
– बंगाल की रामलीला परंपरा काफी हद तक कृत्तिवासी रामायण पर आधारित है, और इसका प्रभाव हिंदी पट्टी की कुछ सीमावर्ती रामलीलाओं पर भी देखा जा सकता है।